July 16, 2024 : 1:59 AM
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रूस के सैनिकों ने यूक्रेनी परिवार को गोलियों से छलनी किया,

रूस के हमलों से बचकर यूक्रेन से भाग रहे एक परिवार को रूसी सैनिकों ने मार दिया है.

इस परिवार के रिश्तेदारों ने बीबीसी को बताया है कि उन पर दक्षिणी यूक्रेन में एक सुरक्षा चौकी पर हमला किया गया. कुल पांच लोगों की मौत हो गई.

इस लेख की कुछ जानकारियां पाठकों को विचलित कर सकती हैं.

24 फ़रवरी को जब रूस की सेनाओं ने यूक्रेन पर आक्रामण शुरू किया तब दक्षिणी शहर खेरसोन में रहने वाले फेडको परिवार ने जान बचाकर भागने की कोशिश की. परिवार ग्रामीण क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के पास जा रहा था. ये इलाक़ा खेरसोन के मुक़ाबले अधिक सुरक्षित था.

पुलिसकर्मी ओलेग पीछे ही रुक गए थे क्योंकि हमले के बाद पुलिस विभाग हाई अलर्ट पर था.

उनके पिता उनकी पत्नी इरीना और दो बच्चों, छह साल की सोफिया और दो महीने के ईवान को लेने के लिए आए थे.

इस परिवार के गांव पहुंचने के कुछ देर बाद ही रूस की सेना यहां पहुंच गई थी. ये सैनिक क्राइमिया से यूक्रेन पहुंचे थे. रूस ने साल 2014 में यूक्रेन के इस प्रायद्वीप पर क़ब्ज़ा किया था.

यहां से घुसी रूसी सेना तेज़ी से यूक्रेन के इलाक़ों में आगे बढ़ी थी क्योंकि उसे किसी भारी प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा था.

बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई थी. परिवार को चिंता थी कि वो फिर से लड़ाई के बीच फंस जाएंगे इसलिए ये लोग गांव छोड़कर दूसरे गांव नोवा काखोव्का की तरफ़ बढ़े, जहां उनके रिश्तेदार रहते हैं.

अब वो एक बड़े समूह में थे जो दो कारों में सवार था. एक मैं ओलेग के मौसा-मौसी और भाई-बहने थीं. दूसरी कार में उनके माता-पिता, पत्नी और बच्चे थे.

ओलेग के माता-पिता

ओलेग के माता-पिता

 

उन्हें एक बांध से गुज़रना था जो पहले से ही रूस की सेना के नियंत्रण में था. ये बांध नाइप्रो नदि पर है जो यूक्रेन को दो हिस्सो में बांटती है.

पहली कार रूसी सैनिकों की सुरक्षा चौकी को पार कर गई थी लेकिन दूसरी गाड़ी उनकी नज़र से ओझल हो गई.

ओलेग के भाई डेनिस यूक्रेन के चेर्केसी शहर से मोबाइल के ज़रिए परिजनों की लोकेशन पर नज़र रखे हुए थे.

शाम को पांच बजकर 13 मिनट पर डेनिस ने अपनी मां के फ़ोन पर कॉल किया.

वो बताते हैं, “मैं अपनी मां को नोवा काखोव्का ना जाने के लिए समझाने की कोशिश कर रहा था. मैं उनसे कह रहा था कि ओडेसा जाओ, वहां मेरा एक फ्लैट है.”

वो बताते हैं, उसी पल मैंने अपनी मां की चीख सुनीं, वो कह रहीं थीं, हे ईश्वर, वो एक बच्चा है, तुम ऐसा कैसे कर सकते हो.

वो बताते हैं कि उनकी भाभी भी चिल्ला रहीं थीं.

वो बताते हैं, “फिर मैंने गोली चलने की आवाज़ सुनी. कार रुक गई थी, गाड़ी का खुला दरवाज़ा बीप की आवाज़ कर रहा था. मैंने बच्चे को रोते हुए सुना. वो रोए जा रहा था. फिर मैंने और गोलियां चलने की आवाज़ सुनी.”

डेनिस हतप्रभ थे, वो समझ नहीं पा रहे थे कि क्या हो रहा है और वो इस स्थिति में क्या कर सकते हैं.

उनकी मौसी जिनका नाम भी इरीना है, बदहवासी में अपनी बहन को फ़ोन करने की कोशिश कर रहीं थीं.

ईरीना ने कार में मौजूद सभी के फ़ोन लगाए लेकिन किसी ने नहीं उठाया. घंटियां बजती रहीं. अब इरीना परेशान हो गईं थीं, उन्होंने तय किया कि लौटकर देखें क्या हुआ है.

इरीना चैकप्वाइंट पर पहुंची और कार के बारे में पूछा तो एक सैनिक ने बताया कि वो गड्डे में पड़ी है.

सैनिक ने बताया कि ड्राइवर ने अधिकारी के आदेश का पालन नहीं किया और उन्हें कुचलने की कोशिश की.

इरीना बताती हैं कि वो सैनिकों के सामने गिड़गिड़ाईं और अपने पति के साथ कार के पास जाने की भीख मांगी. दो सैनिक उनके पति ओलेक्सेंदर को कार के पास लेकर गए. पूरी गाड़ी गोलियों से छलनी थी. कार के आगे पीछे और चारों तरफ़ गोलियों के निशान थे.

इरीना और सोफ़िया जो सुरक्षित स्थान पर जाने का प्रयास कर रहीं थीं

इमेज स्रोत,FAMILY PICTURE

इवान को एक सैनिक ने कार से बाहर निकाला. वो रो रहा था.

“मैंने सैनिकों को बताया कि सोफ़िया भी कार में थी, पिछली सीट पर बैठी थी, और मैं कार की तरफ दौड़ी.”

ओलेक्सेंदर बताते हैं, “मैंने उसे देखा, उसके सीने में गोली ने सुराख़ कर दिया था. तीन वयस्क, ओलेग के माता-पिता और पत्नी की मौत हो चुकी थी.”

सोफ़िया अभी जीवित थी. इवान अब चुप हो गया था. इरीना और ओलेक्सेंदर उन्हें अपनी कार में लेकर आए और अस्पताल की तरफ़ दौड़े.

लेकिन डॉक्टर इन बच्चों को बचा नहीं सके.

अस्पताल जाकर पता चला कि इवान को भी गोली लगी थी.

ओलेक्सेंदर बताते हैं, “उसे कान में गोली लगी थी जो पीछे सिर से होते हुए निकल गई थी. उसका चेहरा साफ़ था लेकिन पीछे से सिर ख़ून में सना था. लेकिन वो ज़िंदा था और रो रहा था.”

वो बताते हैं कि इस दौरान रूस के सैनिक वहीं थे लेकिन उन्होंने कार के पास जाकर किसी को देखने की कोई कोशिश नहीं की.

इरीना अब अपने आप को संभाल नहीं पा रही हैं. वो कहती हैं, “मुझे यक़ीन नहीं होता कि वो सब अब नहीं हैं. मैं समझ नहीं पा रही हूं कि हमारे साथ ऐसा हो गया है. मैं हर वक़्त बस रोती रहती हूं.”

रूस की सेना ने अगले दिन परिवार को उनके शव उठाने की अनुमति दी. शवों का परीक्षण करने वाले डॉक्टर बताते हैं कि सभी को कई गोलियां लगी थीं.

बीबीसी ने इस घटना पर रूस का पक्ष जानने के लिए रूस के रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया है.

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