June 3, 2023 : 6:54 AM
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छिपने का ठिकाना और आर्थिक मदद के चलते मध्य प्रदेश में पनाह ले रहे देशविरोधी तत्व

naidunia
देशविरोधी संगठन सिमी, जेएमबी, पीएफआइ के बाद हिज्ब-उत्-तहरीर (एचयूटी) का नेटवर्क मध्य प्रदेश (भोपाल, छिंदवाड़ा ) में मिला है। शांति का टापू कहे जाने वाले प्रदेश में इनकी गतिविधियां बढ़ने की दो मुख्य वजह पुलिस के वर्तमान और सेवानिवृत अधिकारी मानते हैं। एक तो यह कि यहां उन्हें कुछ क्षेत्रों में रहने का सुरक्षित ठिकाना मिल जाता है। दूसरा यह कि उन्हें आर्थिक मदद आसानी से मिल जाती है। पुलिस की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में ऐसे तीन पाकेट (क्षेत्र) हैं जहां ये खुद काे सुरक्षित मानते हैं। एक जबलपुर, नरसिंहुपर व इससे लगा क्षेत्र। दूसरा, खंडवा, खरगोन और श्याेपुर और तीसरा भोपाल व इससे लगा क्षेत्र। ग्वालियर क्षेत्र में उनकी गतिविधियां इसलिए नहीं मिल रही हैं कि उन्हें उस क्षेत्र में आर्थिक मदद नहीं मिल पाती पुलिस का खुफिया तंत्र कमजाेर हाेने की वजह से उन्हें खुद पर कार्रवाई का डर नहीं रहता। 

 

विभिन्न आतंकवादी संगठनों का नेटवर्क रहने की वजह से उन्हें अपनी विचारधारा वाले लोगों की पहचान करने और उन्हें जोड़ने में आसानी होती है। 

 

 

भोपाल में ऐशबाग और शाहजहांनाबाद क्षेत्र में जेएमबी, पीएफआइ के बाद एचयूटी की सक्रियता रही है। इसकी वजह यह कि यहां की कोलोनियों में नए लोगों के आने-जाने और ठहरने में रहवासियों को कोई आपत्ति नहीं होती। इसी कारण वह घनी आबादी वाले क्षेत्रों में रहते हैं। 

 

पुलिस की सख्ती भी नहीं है। आसानी से किराये के मकान उपलब्ध हो जाते हैं।

अब तक पकड़े गए आरोपित

 

 

 

इसके पहले जमात-ए-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) और पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) पर मध्य प्रदेश पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। मार्च 2022 में एटीएस ने जेएमबी के तीन बांग्लादेशी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। सितंबर 2022 में पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन पीएफआइ के 22 सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

विशेषज्ञ की राय

 

 

 

 

 

यह लोग रुकने के लिए ऐसे क्षेत्रों की तलाश करते हैं जो शांत हो। उन पर किसी की निगाह न रहे। भोपाल या प्रदेश में अन्य जगह अभी तक जहां इनकी गतिविधि मिली हैं वहां भी ऐसी ही स्थिति है। अच्छी कालोनियों में आने-जाने वालों पर हर किसी की नजर रहती है।

विवेक जौहरी, पूर्व पुलिस महानिदेशक, मप्र

चैटिंग एप बदल-बदलकर उपयोग करने से संदेह के घेरे में आए एचयूटी के सदस्य 

कट्टरपंथी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (एचयूटी) का मास्टरमाइंड यासिर खान लगभग एक वर्ष में तीन ठिकाने बदल चुका था। एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए एचयूटी के सदस्य बातचीत के लिए चैटिंग एप का उपयोग करते थे। वे एप भी जल्दी-जल्दी बदल लेते थे। इस कारण इन पर संदेह गहरा हो गया था। एक पूरी टीम इस विचारधारा के लोगों पर निगरानी कर रही थी, इसके लिए घंटों तक तकनीकी सहायकों की मदद ली जाती थी, लेकिन कार्रवाई के लिए उचित समय का इंतजार हो रहा था। वे चुपके से कहीं आते-जाते थे। इस कारण पुलिस के खुफिया तंत्र की इन पर तीन वर्ष से निगाह थी। बता दें कि मप्र आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने मंगलवार को एचयूटी से जुड़े 16 लोगों को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने आरोपितों को 19 मई तक एटीएस की रिमांड पर सौंपा है। उनसे पूछताछ की जा रही है।

हैदराबाद में लाए गए पांचों आरोपितों को कोर्ट में पेश किया, 19 तक पुलिस रिमांड पर

 

 

हैदाराबाद में मंगलवार को गिरफ्तार किए गए एचयूटी के सदस्यों को गुरुवार को जिला न्यायालय भोपाल में पेश किया गया। यहां से एटीएस ने उन्हें 19 मई तक के लिए रिमांड पर लिया है। इनमें एक भोपाल जिले के बैरसिया का रहने वाला है। वह हैदराबाद में एक कालेज में डिमांस्ट्रेटर का काम करने के साथ ही संगठन को विस्तार देने में लगा था।

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