July 16, 2024 : 2:00 AM
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17 औरतों को झांसा देकर शादी और करोड़ों का फ़रेब करने वाला कैसे पकड़ा गया

ख़ुद को कभी डॉक्टर तो कभी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का वरिष्ठ अधिकारी बताकर 17 महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर उनसे शादी करने और पैसे ठगने वाले एक धूर्त व्यक्ति को भुवनेश्वर पुलिस ने गिरफ़्तार किया है.

66 साल के रमेश चंद्र स्वाईं को रविवार देर रात भुवनेश्वर के खंडगिरी इलाके के एक अपार्टमेंट से गिरफ़्तार किया गया और सोमवार को वहां के सब डिविज़नल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

चिकनी-चुपड़ी बातों से औरतों को फांसने वाले रमेश पर आठ राज्यों की 17 औरतों से धोखे से शादी करने और उनसे पैसे ऐंठने का आरोप है. इन 17 महिलाओं में चार ओडिशा से, तीन-तीन असम और दिल्ली से, दो-दो मध्य प्रदेश और पंजाब से और एक-एक उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ से हैं.

भुवनेश्वर के डीसीपी उमाशंकर दास

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भुवनेश्वर के डीसीपी उमाशंकर दास

भुवनेश्वर के डीसीपी उमाशंकर दास ने बीबीसी से कहा कि इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि रमेश ने इन 17 के अलावा और भी कई औरतों को अपने जाल में फांसा हो.

उन्होंने कहा, “17 में से तीन औरतों के बारे में जानकारी हमें रमेश की गिरफ़्तारी के बाद मिली. इन तीन में से एक ओडिशा, एक छत्तीसगढ़ और एक असम की रहनेवाली हैं और तीनों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है. हम उसे रिमांड में लेंगे और उससे पूछताछ कर यह पता करने की कोशिश करेंगे कि इन 17 के अलावा उसने किसी अन्य महिला को अपने जाल में तो नहीं फंसाया है.”दास ने बताया कि रिमांड के दौरान रमेश से उसके कारनामों के बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने के लिए भुवनेश्वर महिला थाना के प्रभारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है. रमेश के मोबाइल फ़ोन को फ़ोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा और उनके वित्तीय लेनदेन के बारे में भी पड़ताल की जाएगी.

रमेश चंद्र स्वाईं

कैसे पकड़े गए रमेश 

रमेश की गिरफ़्तारी के बारे में जानकारी देते हुए डीसीपी दास ने कहा, “हमें कई दिनों से इस आदमी की तलाश थी और हमने उसे पकड़ने के लिए जाल बिछा रखा था. लेकिन वह कई महीनों से भुवनेश्वर से बाहर रह रहा था और उसने अपना मोबाइल नंबर भी बदल दिया था. इसलिए उसे पकड़ना संभव नहीं हो पा रहा था. आख़िरकार रविवार को हमें एक सूत्र से पता चला कि वह भुवनेश्वर आया है और हमने उसे उसी रात उसके खंडगिरी वाले अपार्टमेंट से दबोच लिया.”

भुवनेश्वर पुलिस को जिस मामले में रमेश की तलाश थी, वह मामला उनके द्वारा ठगी गई 17 महिलाओं में एक ने दर्ज कराया था. दिल्ली के एक स्कूल में पढ़ाने वाली महिला रमेश की आख़िरी शिकार थी.

अपने आप को स्वास्थ्य मंत्रालय का उप महानिदेशक बताते हुए रमेश ने इस औरत से रिश्ता जोड़ा और फिर 2020 में कुबेरपुरी के आर्य समाज मंदिर में उनसे शादी कर ली. कुछ दिन दिल्ली में रहने के बाद रमेश अपनी नई नवेली दुल्हन को लेकर भुवनेश्वर आए और खंडगिरी में एक अपार्टमेंट में रहने लगे.

भुवनेश्वर में रहने के दौरान दिल्ली की इस महिला को किसी तरह पता चला कि रमेश पहले से ही शादीशुदा हैं. इस बारे में पूरी तसल्ली करने के बाद उन्होंने 5 जुलाई, 2021 को भुवनेश्वर के महिला थाने में रमेश के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की और ख़ुद दिल्ली लौट गई.

भुवनेश्वर पुलिस ने आईपीसी की धारा 498 (A), 419, 468, 471 और 494 के तहत रमेश के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया और उनकी तलाश शुरू की. लेकिन रमेश को शायद इस बात की भनक लग गई. उन्होंने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया और भुवनेश्वर से नदारद हो गए.

पुलिस के मुताबिक़ इस दौरान वह गुवाहाटी में रहनेवाली अपनी एक और पत्नी के साथ रहे.

सात महीने बाद रमेश यह समझकर भुवनेश्वर वापस आए कि अब मामला ठंडा पड़ गया है, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि उनकी दिल्ली वाली पत्नी ने वहां मुखबिर लगा रखा था जिसने रमेश के खंडगिरी फ़्लैट में वापस आते ही उन्हें ख़बर कर दी. महिला ने तत्काल यह जानकारी भुवनेश्वर पुलिस को दी और आख़िरकार वर्षों से औरतों और पुलिस को चकमा देकर भागनेवाले रमेश पुलिस की गिरफ़्त में आ गए.

पहला शिकार

ओडिशा के केंद्रापाड़ा ज़िले के पाटकुरा के निवासी रमेश की पहली शादी 1982 में हुई थी. अपनी पहली पत्नी से उसके तीन बेटे हैं. तीनों डॉक्टर हैं और विदेश में रहते हैं.

अपनी पहली शादी के पूरे 20 साल बाद 2002 में उन्होंने अपने पहले शिकार को अपने जाल में फांसा. पुलिस सूत्रों के अनुसार, उनके जाल में फंसने वाली यह औरत झारखंड की रहनेवाली थी और ओडिशा के बंदरगाह नगर पारादीप में एक निजी कंपनी द्वारा चलाए जा रहे एक अस्पताल में डॉक्टर थी.

कुछ दिन बाद इस महिला का तबादला इलाहाबाद हो गया तो रमेश वहां जाकर उस “पत्नी” के साथ रहने लगे और उसे झांसा देकर बीच-बीच में उससे पैसे और गहने ऐंठने लगे.

भुवनेश्वर पुलिस को अभी तक मिली जानकारी के अनुसार रमेश ने दिल्ली की अपनी टीचर पत्नी से 13 लाख और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस की एक महिला अधिकारी से 10 लाख रुपए ठगे थे. उनके अन्य धोखाधड़ी के कारनामों के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है.

औरतों को कैसे फांसते थे

शातिर रमेश अपना शिकार बहुत सावधानी से चुनते थे. अपना शिकार ढूंढने के लिए वह ज़्यादातर मैट्रिमोनियल साइट का सहारा लिया करते थे. वह ऐसी औरतों को ही चुनते थे जिनकी उम्र बढ़ने के बाद भी शादी न हुई हो या जिनका तलाक़ हो गया हो या फिर जो पति से अलग हो गई हों. लेकिन अपना शिकार तय करते समय वह इस बात का ख़ास ध्यान रखते थे कि औरत या तो नौकरी पेशा हो या फिर काफ़ी पैसे वाली हो.

अपना टारगेट तय करने के बाद रमेश मैट्रिमोनियल साइट के ज़रिए उनसे संपर्क स्थापित किया करते थे. फिर उनसे मिलकर अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से उनका विश्वास जीत लेते थे.

रमेश अपने आप को कभी डॉक्टर तो कभी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का वरिष्ठ अधिकारी बताते थे. भुवनेश्वर पुलिस के मुताबिक अपने शिकार के मन में विश्वास पैदा करने के लिए उन्होंने कई जाली परिचय-पत्र बना रखे थे.

इसके अलावा वह स्वास्थ्य मंत्रालय के लोगो वाली नकली चिट्ठी का भी इस्तेमाल करते थे. रमेश ने बिधुभूषण स्वाईं और रमणी रंजन स्वाईं के नाम से फ़र्ज़ी परिचय-पत्र बना रखे थे, जो उनकी गिरफ़्तारी के दौरान उसके खंडगिरी वाले फ़्लैट से बरामद हुए.

रमेश डाक्टर नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कोच्चि से पारा मेडिकल, लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी और फ़ार्मेसी का डिप्लोमा कोर्स किया था जिससे उन्हें चिकित्सा विज्ञान के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी थी. यह जानकारी औरतों को झांसा देने में काम आती थी.

रमेश चंद्र स्वैन

इमेज कैप्शन,रमेश चंद्र स्वाईं ख़ुद को कभी डॉक्टर तो कभी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का वरिष्ठ अधिकारी बताते थे

धोखाधड़ी के अन्य मामले

औरतों से झूठी शादी कर उन्हें ठगने के अलावा रमेश ने कई और लोगों को भी ठगा. उन्होंने मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का वादा कर देश के कई नौजवानों को अपने जाल में फांसा और उनसे रुपये ऐंठे. इस सिलसिले में वह हैदराबाद पुलिस के स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एस टी एफ़) द्वारा गिरफ़्तार भी किए गए थे. लेकिन ज़मानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने फिर अपना धोखाधड़ी का काम शुरू कर दिया.

डीसीपी दास ने कहा कि इस संदर्भ में भुवनेश्वर पुलिस हैदराबाद पुलिस से संपर्क कर और जानकारी हासिल कर रही है.

इसके अलावा रमेश ने 2006 में मेडिकल छात्रों को शिक्षा ऋण दिलाने के लिए फ़र्ज़ी दस्तावेज़ देकर केरल के विभिन्न बैंकों से एक करोड़ रुपए से भी अधिक की रक़म की ठगी की थी. इस मामले में भी वह गिरफ़्तार हुए थे, लेकिन कुछ दिन बाद ज़मानत पर रिहा हो गए थे.

यही नहीं, रमेश ने एक गुरुद्वारे को मेडिकल कालेज खोलने की अनुमति दिलाने का झांसा देकर 13 लाख रुपए ठग लिए थे.

देश के कई राज्यों में इतने सारे लोगों को ठगने और दो बार गिरफ्तार होने के बावजूद रमेश अब तक क़ानून की गिरफ़्त में कैसे नहीं आए और अपने ख़ुराफ़ाती दिमाग़ का इस्तेमाल कर औरतों से शादी करते रहे और लोगों को ठगते रहे, यह अचरज में डालने वाली बात है.

 

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