May 31, 2024 : 12:53 AM
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हत्या के बाद कुशाग्र के घर पहुंचे ‘कातिल’ ने सोसायटी गार्ड से क्या कहा?

जिस दिन कुशाग्र की हत्या के बाद मुख्य आरोपी प्रभात अपने दोस्त के साथ स्कूटी से फिरौती का लेटर फेंकने सोसायटी आया था, उस वक्त गार्ड राजेंद्र नाइट ड्यूटी पर तैनात था. बकौल राजेंद्र- वो लड़का मुझे लिफाफा देने आया था. बोला कि मनीष भैया (कुशाग्र के पिता) का लिफाफा है, उन्हें दे देना. मैंने कहा कि आप ही देकर आओ

कानपुर केस में गिरफ्तार दोनों आरोपी (बाएं) और सोसीयटी का गार्ड (दाएं) कानपुर केस में गिरफ्तार दोनों आरोपी (बाएं) और सोसीयटी का गार्ड (दाएं)

कानपुर में 10वीं के छात्र कुशाग्र की हत्या के केस पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. कुशाग्र की सोसायटी के गार्ड राजेंद्र की तत्परता और पैनी नजर के चलते पुलिस हत्यारोपियों तक आसानी से पहुंच पाई. राजेंद्र ने ही पुलिस को अहम सूचना दी थी, जिसकी वजह से हत्याकांड का खुलासा हुआ. ‘आज तक’ से बात करते हुए गार्ड  राजेंद्र ने क्या, कुछ कहा आइए जानते हैं…

दरअसल, जिस दिन (30 अक्टूबर) कुशाग्र की हत्या के बाद मुख्य आरोपी प्रभात अपने दोस्त शिवा के साथ स्कूटी से फिरौती का लेटर फेंकने सोसायटी आया था, उस वक्त राजेंद्र नाइट ड्यूटी पर तैनात था. बकौल राजेंद्र- वो लड़का मुझे लिफाफा देने आया था. बोला कि मनीष भैया (कुशाग्र के पिता) का लिफाफा है, उन्हें दे देना. मैंने कहा कि आप ही देकर आओ. हेलमेट हटाकर जाना. जिसके बाद वह ऊपर बिल्डिंग की ओर चला गया. मैंने देखा उसकी स्कूटी के नंबर प्लेट पर कालिख पुती थी. पीछे नंबर प्लेट पर रुमाल लगा हुआ था. रुमाल हटाकर गाड़ी का नंबर नोट कर लिया. फोटो खींचना चाहता था… मगर तब तक वो आ गया था.वहीं, इस घटना को लेकर कुशाग्र के मामा ने कहा कि जब रात में कुशाग्र घर नहीं लौटा तो हमने खोजबीन शुरू की. पुलिस को सूचना दी. तभी गार्ड ने बताया कि स्कूटी से दो युवक आए थे. संदिग्ध लग रहे थे. एक लेटर देकर गए हैं. लेटर फिरौती का था. फिर हमने सीसीटीवी चेक किया तो स्कूटी की पहचान के आधार कुशाग्र की ट्यूशन टीचर रही रचिता वत्स के घर पहुंचे. उससे स्कूटी के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वो उसके बॉयफ्रेंड प्रभात के पास है. फिर जब हम लोग प्रभात के घर पहुंचे तो देखा कि स्कूटी का नंबर बदला हुआ था. शक होने पर उसे पुलिस के पास लेकर गए. पुलिस ने जांच की तो देखा कि नंबर प्लेट ढीली थी. सीसीटीवी से मिलान किया तो स्कूटी एकदम वैसी दिखी जो फिरौती का लेटर  फेंकने आए युवकों के पास थी. कड़ाई से पूछताछ हुई तो पूरा मामला खुल गया. बाद में प्रभात की निशानदेही पर कुशाग्र का शव उसके घर से बरामद हुआ. हत्याकांड को अंजाम देने के बाद रचिता और प्रभात ने पुलिस और कुशाग्र के घरवालों को गुमराह करने का भी काम किया. खुद रचिता ने कुशाग्र के मामा को कॉल किया था. पुलिस का कहना है कि रचिता ने कुशाग्र के मामा को फोन कर उसके लापता होने पर चिंता जताई थी और पल-पल की जानकारी ले रही थी. वो ऐसा इसलिए कर रही थी, ताकि पुलिस को उस पर शक न हो.

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