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जगह के मुताबिक तेल बदलना फायदेमंद, दक्षिण में नारियल और पश्चिम भारत में मूंगफली तेल के हैं अलग-अलग फायदे

  • शेफ संजीव कपूर के मुताबिक, ज्यादातर तेलों के बारे में लोगों के पास सही जानकारी नहीं
  • बेहतर स्वाद के लिए तेल का चयन भी अहम क्योंकि यह डिश के पूरे स्वाद को बदल देता है

दैनिक भास्कर

Mar 15, 2020, 01:27 PM IST

संजीव कपूर, शेफ
मेरे लिए भोजन में विविधता भारत के विभिन्न हिस्सों में बनने वाले विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से आती है। व्यंजन में सिर्फ अलग-अलग सामग्री ही नहीं बल्कि सही तरह के तेल का चयन भी बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि तेल डिश के पूरे स्वाद को बदल देता है। कुछ तेलों के बारे में कई गलत धारणाएं हैं, जैसे कि सरसों का तेल, नारियल तेल, तिल का तेल, आदि में बहुत कैलोरीज होती हैं, लेकिन किसी भी तेल के 1 ग्राम में केवल 9 कैलोरी होती है। जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों का तेलों पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। मैं उत्तर भारत में बड़ा हुआ हूं और मैंने वहां सरसों के तेल में पका हुआ खाना खाया है, जबकि मेरी बेटियां मुंबई में ज्यादातर मूंगफली और सूरजमुखी के तेल में पके खाने का सेवन करती हैं।

मेरे हिसाब से आप जिस जगह पर हैं आपको उसके हिसाब से तेल का सेवन करना चाहिए क्योंकि विभिन्न कारक आपके पाचन को प्रभावित करते हैं। इसलिए जब भी मैं यात्रा करता हूं, तो उसी क्षेत्र के स्थानीय खाना पकाने के तेलों का उपयोग करके विभिन्न व्यंजन बनाने की कोशिश करता हूं। इसलिए, मैं आपके साथ विभिन्न तेलों की कुछ जानकारी साझा करने जा रहा हूं।

  • सरसों का तेल- इसमें आवश्यक विटामिन और मिनरल्स हैं। यदि आप उत्तर या पूर्व भारत से हैं तो आपके लिए ये सबसे अच्छा ऑप्शन है क्योंकि यह अधिक मात्रा में उपलब्ध है। इसका स्वाद तीखा है, इसलिए इसे तब तक गर्म करें जब तक ये स्मोकी न हो जाए फिर इसे आवश्यकतानुसार उपयोग करें।
  • नारियल तेल- यह दक्षिण भारत में पहले से ही प्रधान है। इसमें ऐसे फैट्स मौजूद हैं जो आपको वजन घटाने और आपके चयापचय को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। आजकल, कोल्ड प्रेस्ड नारियल तेल विभिन्न स्वास्थ्य लाभों के कारण लोकप्रिय है। 
  • मूंगफली का तेल- पश्चिम भारत के लोग आमतौर पर इस तेल का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि सबसे अच्छी मूंगफली गुजरात से आती है। इसमें भरपूर एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो हानिकारक कणों से लड़ते हैं।
  • तिल का तेल- इसे जिंजेली तेल भी कहा जाता है। यह ओमेगा 6 फैटी एसिड में समृद्ध है जो हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। यह आमतौर पर तमिलनाडु, केरल और कई अलग-अलग दक्षिण एशियाई देशों में ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से ये तेल इसके स्वाद और सुगंध की वजह से बहुत पसंद है।

इसका ये मतलब यह नहीं है कि आप उन तेलों का चयन नहीं कर सकते जो आपके क्षेत्र के नहीं हैं। बेशक, आप विभिन्न अन्य तेलों जैसे कि जैतून का तेल, चावल की भूसी का तेल, सूरजमुखी का तेल आदि का सेवन भी कर सकती हैं। लेकिन, लोकल लोगों को अधिकतम स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए स्थानीय तेल इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

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