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उम्र संबंधी रोगों से बुजुर्गों में एक-तिहाई के दुर्घटनावश गिरने खतरा, एक्सपर्ट बता रहे हैं बचने के 5 उपाय

  • बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वर्ष 2050 तक यह कुल जनसंख्या का 19 प्रतिशत हो सकते हैं
  • एएमडी के लगभग 74 प्रतिशत रोगियों को गिरने या न गिरने से चोट लगी है
  • फरवरी एएमडी पर जागरूकता का महीना है,वर्ष 2040 तक एएमडी के 288 मिलियन रोगी होंगे

दैनिक भास्कर

Mar 02, 2020, 12:41 PM IST

हेल्थ डेस्क.  एक अध्ययन से पता चला है कि आयु-सम्बंधी मैक्युलर डीजनरेशन (एएमडी) के रोगियों में से एक-तिहाई (74 प्रतिशत) को गिरने या न गिरने से चोट लगी है । एएमडी सेंट्रल विजुअल लॉस का बड़ा कारण है, जो 65 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 10 प्रतिशत लोगों और 75 वर्ष से अधिक आयु के 25 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को प्रभावित करता है ।

चीजों को देखने में यह अक्षमता बुजुर्गों के बार-बार गिरने का कारण बनती है और कभी-कभी उन्हें शरीर पर गंभीर चोटें लगती हैं। एएमडी के रोगियों का दृष्टिबाधित होना गिरने की घटनाओं से जुड़ा है । यह एएमडी के पीड़ित बढ़ती आयु के लोगों की सबसे गंभीर और आम समस्याओं में से एक है, जिसमें चोट के कारण मृत्यु होने की दर सबसे अधिक है। 

एएमडी क्या है?
एएमडी एक प्रगतिशील रोग है, जिसमें रेटिना के मध्यभाग मैक्युला के नीचे असामान्य रक्त वाहिकाएं विकसित होती हैं। यह रक्त वाहिकाएं रेटिना में रक्त और तरल का रिसाव करती हैं, जिससे सेंट्रल विजन खराब होता है।
डॉ. राजवर्द्धन आज़ाद, वरिष्ठ कंसल्टेन्ट विट्रीयोरेटिनल सर्जन, भूतपूर्व प्रमुख, डॉ. आर. पी. सेंटर, एम्स नई दिल्ली, ऑल इंडिया कॉलेजियम ऑफ ऑफ्थैल्मोलॉजी के प्रेसिडेन्ट कहते हैं, ‘‘एएमडी जैसे रेटिना के रोगों के आम लक्षणों में धुंधला या विकृत दिखाई देना, सेंट्रल विजन में गहरे धब्बे या सीधी रेखाओं का लहरदार दिखना शामिल हैं। रेटिना के रोग अक्सर जाँच में नहीं आते हैं, क्योंकि इनके लक्षण दर्द-रहित होते हैं और खराब आँख का काम अच्छी आँख कर देती है। दृष्टि में बड़ी खराबी होने या एक आँख बंद करने पर इस ओर ध्यान जाता है। इसलिये, लक्षणों को समझना और शीघ्रता से विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है, ताकि व्यक्ति अंधा होने से बच सके।’’

एएमडी रोगियों को गिरने से बचाने के लिये 5 उपाय 

  • देखभाल करने वाले घर पर सुरक्षित वातावरण निर्मित कर रोगी को शारीरिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करें।
  • व्यायाम के माध्यम से ताकत और संतुलन में सुधार।
  • घर में प्रकाश की समुचित व्यवस्था।
  • व्हाइट-केन (दृष्टि में विकृति वाले लोगों के लिये यंत्र) का उपयोग।
  • फिसलने वाले या अस्थिर फुटवियर के उपयोग से बचें।

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