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समय के साथ गंभीर होती जाती है सीकेडी की बीमारी, जाने इसके कारण और बचाव के तरीकें

  • 170 लीटर तक रक्त को फिल्टर करती हैं दोनों किडनियां हर दिन।
  • 10 लाख छोटे-छोटे फिल्टर होते हैं प्रत्येक किडनी में। दोनों किडनियां मिलकर कुल करीब 20 लाख फिल्टर्स। इन फिल्टर्स को नेफ्रॉन्स कहते हैं।

दैनिक भास्कर

Mar 08, 2020, 02:50 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. किडनी का प्रमुख काम शरीर में रक्त को फिल्टर करना तो होता ही है, लेकिन यह कई तरह के उपयोगी हार्मोंस भी रिलीज करती हैं। किडनी पानी और सोडियम, पौटेशियम व फॉस्फोरस जैसे जरूरी मिनरल्स का रक्त में संतुलन बनाने का काम भी करती हैं। किडनी से जुड़ी बीमारियों के लक्षण अक्सर लोग शुरुआती चरण में पहचान नहीं पाते और वक्त के साथ बीमारी गंभीर होती चली जाती है। इसे क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) कहा जाता है। वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर मेदांता- द मेडिसिटी नेफ्रोलोजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. श्याम बिहारी बंसल से जानें इस बीमारी के कारण और बचाव के तरीके।
 
सीकेडी होने पर क्या होगा?

  • दिल को खतरा होना: किडनी की बीमारी में कई बार रक्त में पोटैशियम का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है। इस स्थिति को हाइपरकैलेमिया कहते हैं। इसमें दिल की कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है। कई बार यह जानलेवा भी हो सकता है।
  • हाथ-पैरों में अक्सर सूजन रहना : इससे शरीर में पानी जमा हो सकता है जो एडिमा या वॉटर रिटेंशन नामक बीमारी की वजह बनता है। इससे हाथ-पैरों में अक्सर सूजन रहती है। स्थिति ज्यादा खराब होने पर फेफड़ों में भी पानी भर सकता है।
  • फोकस करने में दिक्कत होना : इससे सेंट्रल नर्वस सिस्टम को भी नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति में फोकस करने में दिक्कत होने लगती है। मन नहीं लगता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना: रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इससे शरीर कई तरह के संक्रामक रोगों का सामना नहीं कर पाता और मरीज अक्सर बीमार रहने लगता है।

किन्हें हैं ज्यादा ख़तरा?

  • डायबिटीज के मरीजों को सीकेडी (क्रोनिक किडनी डिज़ीज) होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। ये मरीज अपना शुगर लेवल हमेशा नियंत्रण में रखें।
  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपने बीपी के लेवल को हमेशा चेक करते रहना चाहिए।
  • जिन्हें दिल की बीमारी है, खासकर जिनकी दिलों तक जाने वाली रक्त वाहिनियों में ब्लॉकेज हैं, उनमें इसकी आशंका रहती है।
  • अधिक वजन होने से भी क्रोनिक किडनी डिज़ीज होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • धूम्रपान करने के आदी व्यक्ति को किडनी की बीमारी होने की आशंका धूम्रपान न करने वालों की तुलना में दोगुनी होती है।
  • अगर परिवार में किसी को पहले से ही किडनी की बीमारी है तो भी सीकेडी होने की संभावना बढ़ जाती है।

ऐसे लोग क्या करें?
किडनी के रोगों से बचाव या किडनी के मरीजों के लिए खानपान में सावधानी रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसमें खासकर नमक और पोटैशियम के सेवन पर नियंत्रण रखना आवश्यक होता है। इसके मरीज को एक दिन में 4-5 ग्राम यानी एक छोटी चम्मच से ज्यादा नमक का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। चटनी, अचार, नमकीन, पापड़ जैसी चीजों में नमक का काफी इस्तेमाल होता है। इसलिए इनका इस्तेमाल तो पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। केले, आलू, मशरूम, खीरे जैसी चीजों में पोटैशियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसलिए इन चीजों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद तो नहींं, लेकिन सीमित करना चाहिए।

फायदेमंद है व्यायाम
किडनी के मरीजों को सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30-30 मिनट के लिए व्यायाम करना चाहिए। एरोबिक व्यायाम जैसे सैर, दौड़ना, साइकल चलाना और बाद में वेट के साथ रेज़िस्टेन्स ट्रेनिंग को शामिल किया जा सकता है। अगर व्यक्ति एरोबिक और रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग जल्द शुरू कर दे तो मसल फंक्शन में सुधार होता है। इससे सीकेडी के मरीज़ के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आता है।
 

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