July 25, 2024 : 9:41 PM
Breaking News
लाइफस्टाइल

गौरैया के बंद किया गुनगुनाना, भारत में 60 फीसदी कम हुईं हाउस स्पैरो

  • रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड के हालिया सर्वे के मुताबिक, पिछले 40 सालों में दूसरे पक्षियों की संख्या बढ़ी और गौरैया घटी
  • दुनियाभर में गौरैया की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 5 भारत में देखने को मिलती हैं

दैनिक भास्कर

Mar 20, 2020, 04:10 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क.  हाउस स्पैरो यानी घर में रहने वाली चिड़िया। नाम में बेशक घर जुड़ा है, लेकिन इसका आशियाना धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड के हालिया सर्वे के मुताबिक, पिछले 40 सालों में दूसरे पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन भारत में गौरैया की तादाद में 60% तक कमी आई है। दुनियाभर में गौरैया की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 5 भारत में देखने को मिलती हैं।
भारत में गौरैया की स्थिति जानने के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी ने हाल में ऑनलाइन सर्वे कराया था। इसमें 7 साल से लेकर 91 साल तक के 5700 पक्षी प्रेमी शामिल हुए। सर्वे में सामने आया कि बेंगलुरू और चेन्नई में गौरैया दिखना बंद हो गई। मुंबई की स्थिति थोड़ी बेहतर रही।

इनकी गणना करना आसान नहीं

उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में पक्षियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान की अध्यक्ष सोनिका कुशवाहा ने बताया, “इनकी गणना करना आसान नहीं है।  रिहायशी और हरियाली वाले इलाकों में सर्वेक्षण और लोगों की सूचना की मदद से इनकी गणना की कोशिश की जाती है। लोगों से अपील की जाती है कि वे गौरैया की मौजूदगी की जानकारी हम तक पहुंचाएं।” 2015 की गणना के अनुसार, लखनऊ में सिर्फ 5692 और पंजाब के कुछ इलाकों में लगभग 775 गौरैया थीं। 2017 में तिरुवनंतपुरम में सिर्फ 29 गौरैया देखी गईं।”

आंध्रप्रदेश में 80% तक कम हुईं गौरैया

  • कन्याकुमारी के स्थानीय एनजीओ त्रवनकोर नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी ने शहर के अलग-अलग जगहों पर इनकी संख्या को लेकर सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि जहां एक साल पहले तक 82 गौरैया दिखती थीं, वहां अब 23 ही दिखती हैं।
  • इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि इनकी संख्या आंध्रप्रदेश में 80% तक कम हुई। केरल, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में इसमें 20 फीसदी तक की कमी देखी गई है।

2010 में शुरू हुआ था विश्व गौरैया दिवस

नेचर फॉरेवर सोसायटी केअध्यक्ष मोहम्मद दिलावर के प्रयासों से पहली बार 2010 में विश्व गौरैया दिवस मनाया गया था। तब से हर साल 20 मार्च को यह दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाना है।

क्यों कम हो रही है इनकी तादाद?

गौरैया ज्यादातर छोटे पेड़ों और झाड़ियों में घोसले बनाना पसंद करती है। पेड़ों में बबूल, नींबू, अमरूद, अनार, मेंहदी, बांस और कनेर शामिल हैं। धीरे-धीरे इनकी तादाद भी कम हो रही है।

दूसरी जगहों पर घोसला बनाने पर इनके बच्चों को बिल्ली, कौए, चील और बाज खा लेते हैं। पहले लोग अपने घरों के आंगन में इन पक्षियों के लिए दाना और पानी रखते रखते थे। अब उसमें भी कमी आई है।

इन्हें बचाने के लिए घर में क्रोकस के पौधे लगाएं

  • गौरैया पर्यावरण संतुलन में अहम रोल निभाती है। गौरैया अपने बच्चों को अल्फा और कटवर्म नाम के कीड़े खिलाती हैं। ये कीड़े फसलों के लिए बेहद खतरनाक हैं। ये फसलों की पत्तियों को खाकर खत्म कर देते हैं। इसके अलावा, बारिश में दिखाई देने वाले कीड़े भी खाती हैं। 
  • इन्हें बचाने और आसरा देने के लिए घर और बगीचे में प्रिमरोज और क्रोकस के पौधे लगाएं। इसकी वजह है कि ये पीले फूलों के पास अधिक दिखाई देती हैं।
  • जूते के डिब्बों, प्लास्टिक की बड़ी बोतलों और मटकियों में छेद कर इनके लिए घोसला तैयार करें। गौरैया को खाने के लिए कोई ऐसी चीज न दें, जिसमें नमक हो।

1851 में पहली बार दिखी थी

  • वेबसाइट ऑल अबाउट बर्ड के मुताबिक, न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में 1851 में गौरैया पहली बार देखी गई थी। 
  • पिछले कुछ सालों के दौरान देखा गया कि गौरैया ज्यादातर उन जगहों पर अपना घोसला बनाती है, जहां उसे सपोर्ट मिल सके। इनमें दीवार, खोखले हो चुके पेड़, स्ट्रीट लाइट आदि शामिल हैं। 
  • 1889 में हुए एक रिसर्च के मुताबिक, दूसरी चिड़ियों के मुकाबले, गौरैया अपने घोसले को बचाने के लिए ज्यादा मेहनत करती है और आक्रमक रहती है। यह रिसर्च चिड़ियों की 70 प्रजातियों पर की गई थी।
  • 2012 में गौरैया को दिल्ली का राज्य पक्षी घोषित किया गया।

Related posts

हिंदू कैलेंडर:25 जुलाई से शुरू होगा सावन, पूरा महीना शिव पूजा के लिए महत्वपूर्ण लेकिन इनमें भी 8 दिन सबसे खास

News Blast

अगर किसी एक काम में धैर्य के साथ आग बढ़ते हैं तो सफलता जरूर मिलती है, शुरुआती असफलता से रास्ता नहीं बदलना चाहिए

News Blast

मुंबई में 4 हेल्थवर्करों को 19 से 65 दिन में दोबारा संक्रमण हुआ; पहली बार में उनमें लक्षण हल्के थे, लेकिन रिकवरी के बाद एंटीबॉडी तक नहीं बनी

News Blast

टिप्पणी दें