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सद्गुरु की बनाई पेंटिंग 4.14 करोड़ में बिकी, गांवों में कोरोना को रोकने के लिए बनाए फंड में दिया सारा पैसा

  • ईशा फाउंडेशन के बीट दी द वायरस फंड में दिए सारे पैसे
  • रोजाना 700 लोगों की टीम गांवों में जरूरतमंदों को बांट रही है खाना 

दैनिक भास्कर

May 01, 2020, 06:10 PM IST

कोयंबटूर. ईशा फाउण्डेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव की पहचान योग गुरु और मोटिवेशनल स्पीकर की है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि सद्गुरु अच्छे चित्रकार भी हैं।  गुरुवार को उनकी एक पेंटिग 4.14 करोड़ की बिकी। इस नीलामी में मिले सारे पैसे को कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने लिए बनाए गए “बीट द वायरस फंड” में दिए गए हैं।

यह फंड कोयंबटूर के थोंड़ामुथूर ब्लॉक के गांवों में कोरोना वायरस के प्रवेश को रोकने के लिए बनाया गया है। पेंटिंग का नाम है ‘टू लिव टोटली!’। ये 5 फीट लंबे-चौड़े कैनवास पर उकेरी गई है। जिसमें पृथ्वी पर जीवन को उकेरा गया है।  

हाल ही के एक सत्संग में सद्गुरु ने घोषणा की थी कि जो भी बीट द वायरस फंड के लिए सबसे अधिक धनराशि दान करता है, उसे यह पेंटिग मिलेगी। पेंटिंग की छोटे साइज़ की प्रतियां भी खरीदने वालों के लिए उपलब्ध होंगी। बीट द वायरस ईशा का धरती से जुड़ा अभियान है, जो महामारी को थोंडामुथूर ब्लॉक के, जिसमें दो लाख से ज्यादा लोग रहते हैं, गांवों में प्रवेश करने से रोकने के लिए है।

पेंटिंग अपने नाम के मुताबिक ही टू लिव टोटली है। इसमें साधना करता हुआ साधक है, हाथी है, डॉल्फिन और अन्य मछलियां, आकाश में चंद्रमा, चींटी सहित कई सारी चीजें उकेरी गई हैं।

रोजाना 700 ईशा फाउंडेशन के वालंटियर्स ताजा बना भोजन गांवों में बांटते हैं और साथ ही प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने वाला एक निलवेंबु कशायम पेय भी देता है। रोजाना के पोषण के अलावा, वालंटियर्स जागरूकता बढ़ाने, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, और अग्रिम कर्मियों और प्रथम उत्तरदाता को सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान करने में प्रशासन की सहायता कर रहे हैं।

ईशा की महामारी राहत गतिविधियां समाज में भुखमरी रोकने की ओर केंद्रित हैं। महामारी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है और गांवों में लाखों लोगों की आजीविका चली गई है। अधिकतर ग्रामीण आबादी रोजाना की कमाई पर निर्भर है, और महामारी को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन से वे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

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