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मुम्बई के स्टार्टअप ने एआई आधारित एक्सरे तकनीक विकसित की जो टीबी का पता लगाने के साथ कोरोनावायरस भी ट्रैक करती है

  • यह एआई आधारित चेस्ट एक्सरे है जो सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच के नतीजे देता है
  • तकनीक फेफड़ों की जांच करके एआई की मदद से कोरोनावायरस का पता लगाने में मदद करती है

दैनिक भास्कर

Mar 31, 2020, 01:03 PM IST

हेल्थ डेस्क. मुंबई के स्टार्टअप क्योर डॉट एआई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  से लैस एक्सरे तकनीक विकसित की है जो टीबी का पता लगाने के साथ कोरोनावायरस को भी ट्रैक करेगी। नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, यह एआई आधारित चेस्ट एक्सरे है जो सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच के नतीजे देता है। 

तकनीक बताती है, फेफड़े कितने प्रभावित

यह तकनीक फेफड़ों की जांच करके एआई की मदद से कोरोनावायरस का पता लगाने में मदद करती है। इसके अलावा यह टीबी, क्रॉनिक पल्मोनरी डिसीज, कार्डियक डिसऑर्डर और फेफड़े डैमेज हैं या नहीं इसकी भी जानकारी देती है। कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के फेफड़े बुरी तरह प्रभावित होते हैं। सांस लेने में तकलीफ होना कॉमन लक्षण है। ऐसे में फेफड़े में होने वाले बदलाव भी वायरस का इशारा करते हैं। 

कई राज्यों में अपनाई गई यह तकनीक

स्टार्टअप के सीईओ प्रशांत वारियर के मुताबिक, यह तकनीक रेडियोलॉजिस्ट और फिजिशियन को कुछ ही सेकंड में बताती है कि शरीर में कोरोनावायरस का संक्रमण है या नहीं। इस  समय कोरोनावायरस के लिए पर्याप्त टेस्ट किट न होने के कारण इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। स्वैब आधारित टेस्ट करके जांच की जा सकती है। देश के कई हिस्सों में राज्य सरकार  हॉस्पिटल्स में इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। 

कोरोना मरीजों को ट्रैक करने वाली ऐप भी विकसित की

क्योर डॉट एआई स्टार्टअप ने qSCOUT नाम से ऐप भी विकसित की है जो स्वास्थ्य कर्मियों को कई अहम जानकारी देती है। यह कोरोनावायरस के मरीजों का रिकॉर्ड रखती है। इसे मोबाइल और कम्प्यूटर दोनों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ऐप आपके कॉन्टेक्ट में मौजूद मरीजों को भी मॉनिटर करती है। ऐप उनके लक्षणों को भी मॉनिटर करती है, वे हॉस्पिटल गए हैं या नहीं इसकी भी जानकारी देती है। 

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