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समर कैंप नहीं होने से राज्यों को 230 करोड़ रु. का घाटा; टैलेंट सोर्स भी खत्म, 10 लाख नए खिलाड़ियों को नुकसान

  • गुजरात में रैकेट स्पोर्ट्स का कैंप न होने से करीब 1400 कोच के रोजगार और 15 हजार खिलाड़ियों पर असर
  • छत्तीसगढ़ खेल मंत्री ने कहा- कोरोना के खत्म होने की स्थिति स्पष्ट होने के बाद कैंप की तारीख घोषित होगी

दैनिक भास्कर

May 13, 2020, 07:37 AM IST

पिछले साल तक अप्रैल, मई, जून इन तीन महीनों में पूरे देश के खेल मैदान पर छोटे-छोटे बच्चों की भीड़ दिखती थी। सभी उभरते हुए खिलाड़ी अपने टैलेंट को तलाशने और तराशने के लिए जुट जाते थे। समर कैंप एक तरह से टैलेंट का सोर्स था, क्योंकि कुछ राज्य यहां से प्रतिभा चुनकर फिर उनकी ट्रेनिंग कराते थे। लेकिन कोरोनावायरस के कारण इस साल उभरती हुई प्रतिभाओं का गढ़ यानी समर कैंप शुरू नहीं हो सका है।

इस बार कैंप होने की उम्मीद भी नहीं दिख रही है। इससे मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, चंडीगढ़ आदि राज्यों के 10 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों को नुकसान हुआ है। इन राज्यों में हर साल करीब इतने खिलाड़ी एक से तीन महीने तक चलने वाले कैंप में हिस्सा लेते थे। कैंप न होने से इन राज्यों को करीब 220 से 230 करोड़ रुपए का घाटा भी उठाना पड़ रहा है।

  • छत्तीसगढ़: आर्थिक नुकसान हो रहा, नई प्रतिभाएं भी नहीं मिलेंगी

यहां कैंप एक महीने से तीन महीने तक चलते हैं। इसमें 17 हजार से अधिक बच्चे शामिल होते हैं। खेल मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि कोरोना के खत्म होने की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अधिकारियों से चर्चा कर कैंप की तारीख की घोषणा कर दी जाएगी। नुकसान की बात करें तो प्रतिभाशाली खिलाड़ी नहीं मिलेंगे। खिलाड़ियों को खेल की बारीकियों को समझने, सुधारने का मौका नहीं मिलेगा। राज्य के स्पोर्ट्स मार्केट को 15-20 करोड़ रु. का घाटा हुआ।

  • चंडीगढ़: हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग नहीं ले पाएंगे खिलाड़ी

हाई-एल्टीट्यूड कैंप होता है जिसमें एथलीट्स को शिलारू (हिमाचल) भेजा जाता है। इसके अलावा दूसरा कैंप अन्य एकेडमी के लिए होता है। एक महीने के इस कैंप में 30 कोर खिलाड़ी होते हैं। प्राइवेट और क्लबों के अन्य छोटे-बड़े कैंप भी आयोजित होते हैं। नुकसान यह है कि खिलाड़ियों को हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग नहीं मिल पा रही। खिलाड़ियों को घर पर प्रैक्टिस करनी पड़ रही है। एकेडमी का कैंप न होने से नए खिलाड़ी अपनी गलतियां नहीं समझ सकेंगे।

  • गुजरात: रैकेट स्पोर्ट्स में 15 हजार खिलाड़ियों को नुकसान

रैकेट स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अनुसार, कैंप न होने से करीब 15 हजार खिलाड़ियों पर असर पड़ा है। टेबल टेनिस के 50 से ज्यादा कैंप होते थे। गुजरात राज्य टेबल टेनिस एसोसिएशन के अनुसार, अगस्त तक खेल शुरू होने की संभावना नहीं है। नुकसान होगा कि प्रदेश में रैकेट स्पोर्ट्स का कैंप न होने से करीब 1400 कोच के रोजगार पर असर पड़ा है। रैकेट स्पोर्ट्स के कैंप न होने से आयोजकों को करीब पौने 3 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

  • झारखंड: ग्रामीण खिलाड़ी स्तरीय ट्रेनिंग नहीं ले सकेंगे

झारखंड में मई-जून में हाेने वाले कैंप लॉकडाउन से प्रभावित हो चुके हैं। इस साल किसी खेल का समर कैंप आयोजित नहीं होगा। सरकार कैंप के आयोजन पर हर साल करीब 60 लाख रुपए खर्च करती है। कई प्राइवेट कैंप भी आयोजित होते हैं। नुकसान यह होगा कि  खेल समन्वयक उमा जायसवाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण नहीं मिल पाएगा। सरकार के अलावा प्राइवेट कैंप के आयोजकों को आर्थिक नुकसान होगा।

  • महाराष्ट्र: 2 हजार एकेडमी लॉक, 30 हजार कोच को घाटा

महाराष्ट्र के 5 बड़े शहर मुंबई, पुणे, नागपुर, औरंगाबाद और अमरावती में तीन महीने समर कैंप लगता था। इनमें ढाई लाख से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेते थे। कुछ कोच ऑनलाइन वर्कआउट सेशन दे रहे हैं। सरकार कैंप के लिए करीब 70 लाख का बजट रखती है। नुकसान की बात करें तो कैंप से 50 हजार लोगों को रोजगार मिलता था। 2 हजार एकेडमी लॉक हैं। 30 हजार कोच को नुकसान हुआ है। करीब साढ़े 4 करोड़ का मार्केट प्रभावित हुआ है। आयोजकों को 4 करोड़ का नुकसान हुआ।

  • राजस्थान: 60 साल से चल रहा आबू कैंप नहीं होगा

राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल एक करोड़ के बजट वाला माउंट आबू कैंप कराती है। 60 साल से चल रहा यह कैंप पहली बार नहीं होगा। काउंसिल के पीअारओ तेजराज सिंह ने कहा- इसमें 6 हजार खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। अन्य कैंप में ढाई लाख खिलाड़ी शामिल होते हैं। नुकसान यह होगा कि कैंप में खिलाड़ियों के स्किल और ओवरऑल डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता था, जो इस बार संभव नहीं दिख रहा। करीब 200 करोड़ रुपए का स्पोर्ट्स बिजनेस प्रभावित हुआ है।

  • मप्र: प्रतिभाशाली खिलाड़ी फ्री सदस्यता से वंचित होगा

दो महीने के कैंप में करीब डेढ़ लाख खिलाड़ी हिस्सा लेते थे। सरकार कैंप के लिए 5 करोड़ का बजट रखती है। खेल विभाग के संयुक्त संचालक डॉ विनोद प्रधान कहते हैं- हमारी प्राथमिकता खिलाड़ी, कोच, कर्मचारियों को कोरोना से बचाना है। ऐसे में कैंप संभव नहीं है। नुकसान की बात करें तो कैंप न होने से प्रतिभाशाली खिलाड़ी एक साल की फ्री सदस्यता से वंचित होंगे। एकेडमी में ट्रेनिंग नहीं ले पाएंगे। स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, स्पोर्ट्सवियर न बिकने से बाजार को करीब 10 करोड़ का नुकसान हुआ।

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