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लगातार गहरी सांस लेकर 59 साल के बुजुर्ग ने कोरोना को हराया, बचने की सम्भावना 50 फीसदी थी लेकिन बहन की सलाह मानी और डटे रहे

  • ब्रिटेन के रॉब थोमस को मार्च के अंत में कोरोनावायरस का संक्रमण हुआ और आईसीयू में भर्ती किया गया
  • हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होते ही अपनी बहन को धन्यवाद अदा किया, डॉक्टर बोले- तुम तो ‘सांस के बादशाह’ हो

दैनिक भास्कर

Apr 25, 2020, 10:30 AM IST

ब्रीदिंग एक्सरसाइज से कोरोना को हराकर घर लौटने वाले 59 साल के रॉब थोमस को ‘सांस का बादशाह’ कहा जा रहा है। थोमस को मार्च के अंत में कोरोनावायरस का संक्रमण हुआ था और ग्लोसेस्टर रॉयल हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। थोमस का पूरा परिवार पहले ही सेप्सिस (एक तरह का संक्रमण) से जूझ रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक, थोमस के बचने की सम्भावना 50 फीसदी थी। इलाज के दौरान उन्होंने गहरी सांस लेना जारी रखा और यही कोरोना से उबरने की वजह बनी।

बहन को धन्यवाद अदा किया
अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद थोमस ने सबसे पहले अपनी बहन को धन्यवाद अदा किया। थोमस की बहन एक रिटायर्ड नर्स हैं और उन्होंने उन्हें इलाज के दौरान गहरी सांस लेने को कहा था। थोमस ने कहा, इलाज के दौरान मेरे कान में बहन के कहे शब्द गूंज रहे थे, मैंने उसका पालन किया और जब मैं हॉस्पिटल के आईसीयू से बाहर आया तो डॉक्टर ने मुझसे कहा, तुम तो सांस के बादशाह हो। 

गहरी सांस लेने की आदत के कारण वेंटिलेटर से हटाया गया

थोमस के मुताबिक, इलाज के दौरान मुझे लगा कि अगर में लेट जाउंगा को सांस लेने में तकलीफ होगी। मैं बैठा और घड़ी की ओर देखते हुए गहरी सांस लेता रहा है। डॉक्टर का कहना था कि गहरी सांस लेने की आदत के कारण ही मेरी हालत में सुधार हुआ और वेंटिलेटर से हटाया गया। 

सेप्सिस के साथ कोरोना का संक्रमण हुआ

थोमस का पूरा परिवार सेप्सिस से जूझ रहा है। वह भले ही घर पहुंच गए हों लेकिन पत्नी, बेटी और बेटा हॉस्पिटल में सेप्सिस का इलाज करा रहे हैं। संक्रमण से पहले थोमस इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स ले रहे थे लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रहा था, इस बीच कोरोना के लक्षण दिखने शुरू हुए। 

मेडिकल स्टाफ का जितना धन्यवाद अदा करूं, कम है
अस्पताल में सेप्सिस से जूझ रहीं थोमस की पत्नी का कहना है, कोरोना से इलाज के दौरान वे हम सबको अपने स्वास्थ्य से जुड़े अपडेट भेजते रहते थे। थोमस कहते हैं, मैं अस्पताल के कर्मचारियों का जितना धन्यवाद अदा करूं, कम है। उन्होंने आईसीयू में मेरी मदद की और फेफड़ों की हालत में सुधार हुआ। धीरे-धीरे मैंने अपने पैरों पर चलना शुरू किया। यह सबकुछ अद्भुत था। 

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