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क्या शैम्पू या डिटर्जेंट से हाथ धो सकते हैं, एक्सपर्ट का जवाब, हाथ झागदार चीजों से धोएं, खाने में प्याज-लहसुन और हल्दी वाला दूध लें ये इम्युनिटी बढ़ाएंगे

  • अगर मास्क मोटा है या बहुत कस के बांधा है तो खुली हवा नहीं मिलती, इसलिए बहुत मोटा मास्क न लगाएं
  • बच्चों को भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराएं, उन्हें घर में ही रखें और हाथ धुलवाते या सैनेटाइज करवाते रहें

दैनिक भास्कर

Apr 27, 2020, 01:55 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस से बचाव के लिए शैम्पू या डिटर्जेंट से हाथ धो सकते हैं, खाने में क्या सावधानी बरतें और मास्क लगाने पर सिरदर्द होता है क्या करें… ऐसे कई सवालों के जवाब पद्मश्री डॉ. मोहसिन वली, वरिष्ठ सलाहकार, राम मनोहर लोहिया अस्प्ताल, नई दिल्ली  ने आकाशवाणी को दिए। जानिए कोरोनावायरस से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब…

#1 ) क्या शैम्पू या डिटर्जेंट से हाथ धो सकते हैं?
हाथ धोने के लिए झाग होना जरूरी है चाहें वॉशिंग पाउडर हो या शैम्पू। जो चिकनाई दूर करे, उससे हाथ धो सकते हैं क्योंकि झाग के सहारे ही वायरस की जो चिकनाई होती है, पानी से धुलने पर निकल जाती है।

#2 )  खाने में क्या-क्या सावधानी बरतें?
खाने में सादा भोजन लें। पानी खूब पीएं। पेट को खाली न रखें। जो भी खाएं अच्छी तरह पकाकर खाएं। कच्ची सब्जी या सलाद का सेवन कम करें। प्याज, लहसुन, हल्दी वाला दूध लें, इससे इम्यून पावर यानी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

#3 ) खेतों में काम करते समय क्या सावधानी बरतें?
गांव में अभी वायरस का संक्रमण कम है। वैसे गांव के लोग पहले से ही अनुशासित रहते हैं। लेकिन हां, खेत में कटाई के वक्त दूर-दूर रहें। मास्क जरूर लगाएं। मास्क नहीं है तो दुपट्‌टा या गमछा लपेट लें। महिलाएं दुपट्‌टा का इस्तेमाल कर सकती हैं। काम करते वक्त सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

#4 ) संक्रमित व्यक्ति किसी वस्तु को छूता है और बाद में दूसरा कोई छूता है तो क्या संक्रमण का खतरा है?
जी हां, संक्रमित व्यक्ति अगर कहीं भी, कुछ भी छूता है तो वायरस वहां जमा हो जाता है। इसलिए सभी को हमेशा हाथ धोने या सैनेटाइज करने को कहा जाता है। क्योंकि संक्रमित खांसता या छींकता है तो कई बार वायरस उसके ऊपर या हाथ या कहीं भी रह सकता है। अनजाने में अगर कोई दूसरा सम्पर्क में आया तो वायरस के संक्रमण का खतरा है।

#5 ) कई मास्क लगाने पर सिरदर्द या अजीब से महसूस होता है, ऐसे में क्या करें?
अगर मास्क मोटा है या बहुत कस के बांधा है तो खुली हवा नहीं मिलती। इसलिए बहुत मोटा मास्क न लगाएं। हां, एन95 मास्क कोई आम आदमी लगा लेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं होगा। उसकी परत मोटी होती है और यह डॉक्टरों के लिए होता है। इसलिए कपड़े का बना मास्क पहनें। मास्क कॉटन के कपड़े का बनाएं उसे 6-7 घंटे में बदल दें। बहुत देर तक इसे लगाने से मास्क पर भी वायरस या जीवाणु बैठ जाते हैं।

#6 ) 14 दिन में देश में लगभग 80 जिलों में एक भी संक्रमण का मामला नहीं आया, इसके क्या कारण हैं?
पहले ही दिन से सरकार कोरोनावायरस का संक्रमण कम करने में जुटी हुई है। प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन के दौरान लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का आग्रह किया। कई देशों में वायरस की स्थिति पर चर्चा की। देश की तमाम जरूरी सेवाओं में लगे लोगों की मेहनत और त्याग का परिणाम है आज देश में कोरोना संक्रमण में दूसरे देशों में बेहतर है।

#7 ) कोविड-19 की वैक्सीन कब तक बन जाएगी?
चीन ने सबसे पहले इस पर काम करना शुरू किया। उसके बाद अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने वैक्सीन बनाने का काम शुरू किया। इंग्लैंड में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी भी वैक्सीन पर काम कर रही है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक साराह गिलबर्ड ने जो टीका बनाया है उसका इंसानों पर परीक्षण भी शुरू कर दिया है। अगर ये कारगर होता है तो सितम्बर तक बाजार में आ जाएगा। अमेरिका ने कहा है, किसी भी देश में वैक्सीन तैयार होती है तो भी 5-6 महीने लगेंगे ही लोगों तक पहुंचने में। 

#8 ) प्लाज्मा थैरेपी क्या है?
प्लाज्मा खून का एक पारदर्शी भाग होता है। जैसे चाय में दूध और पानी दोनों होता है। चाय से अगर ब्लैक वाला हिस्सा निकाल दें तो केवल दूध बचेगा। इसे ही प्लाज्मा समझ लीजिए। जब कोई इंसान कोरोना से संक्रमित होता है तो शरीर में एंटीबॉडीज बनाता है जो इम्युनिटी से विकसित होती है। धीरे-धीरे शरीर में एंटीबॉडीज बढ़ती जाती हैं और संक्रमित इंसान ठीक हो जाता है। ऐसे व्यक्ति का प्लाज्मा निकालकर गंभीर रूप से संक्रमित इंसान या जिनकी जानको खतरा है उनके शरीर में डाल दें तो यह मदद करता है। इस प्रक्रिया को प्लाज्मा थैरेपी कहते हैं।

#9 )  क्या बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है?
जी हां, बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है। बच्चों को घर में ही रखें उनके हाथ धुलवाते या सैनेटाइज करवाते रहें। अगर घर में बुजुर्ग हैं तो बच्चों को उनसे दूर रखें क्योंकि बुजुर्गों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। इस वक्त बुजुर्गों को भी बाहर न जाने दें और न ही बाहर से आने वाले व्यक्ति से मिलने-जुलने दें।

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