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कोरोना इंसानी कोशिका को घेरकर उसमें घुस जाता है, 20 लाख गुना जूम करके उतारी तस्वीरों से पता चला

  • कोशिका को संक्रमित करने की प्रक्रिया की तस्वीरें अमेरिका और ब्राजील के 2 संस्थानों के वैज्ञानिकों ने उतारी हैं
  • वैज्ञानिक कहते हैं कि वायरस का संक्रमण ऐसे ही होता है, लेकिन नोवल कोरोनावायरस सबसे ताकतवर है

दैनिक भास्कर

Apr 30, 2020, 11:39 AM IST

मैरीलेंड. अमेरिका और ब्राजील के दो संस्थानों के वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस की स्पष्ट तस्वीरें उतारी हैं। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोस्कोप की मदद से वायरस की संक्रमण प्रक्रिया को 20 लाख गुना जूम करके देखा गया। इसमें पता चला कि यह वायरस इंसानी कोशिका को पूरी तरह घेर लेता है और उसके अंदर घुस जाता है। इसके बाद वायरस कोशिका के प्रोटीन से जुड़कर उसे नष्ट होने पर मजबूर कर देता है।

कोरोना की संक्रमण प्रक्रिया की तस्वीरें अमेरिका के मैरीलैंड स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शियस डिसीज (एनआईएआईडी), इंटीग्रेटेड रिसर्च फैसिलिटी (आईआरएफ) फोर्ट फोर्ट्रिक, नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट (एनआईएच) और ब्राजील के ओसवाल्डो क्रूज फाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने अलग-अलग प्रयोगों के दौरान उतारी हैं। भारत में भी बीते महीने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के शोधकर्ताओं को कोरोनावायरस की तस्वीरें लेने में कामयाबी मिली है।

तस्वीर लेने में खास तकनीक का इस्तेमाल किया

वैज्ञानिकों ने सैम्पल को 20 लाख गुना बढ़ाने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके लिए सेल कल्चर बनाया गया, फिर कोशिकाओं के वायरस से संक्रमित होने की प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से देखा और वायरस के संक्रमण के तरीके को समझा।

तस्वीरों से समझते हैं कोरोनावायरस और उसका आक्रमण

 कोविड-19 (Sars-Cov-2) के चारों ओर एक ताजनुमा (क्राउन) संरचना है, जिसके कारण इसे कोरोना नाम दिया गया है। लैटिन में क्राउन का मतलब कोरोना होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट, पुणे के डिप्टी डायरेक्टर डॉ अतानु बसु के मुताबिक, कोरोनावायरस के एक कण का आकार 75 नैनो मीटर (एक मीटर का एक अरबवां हिस्सा) होता है।

अमेरिका के मैरीलैंड स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने यह तस्वीर स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोग्राफ तकनीक से ली है। इसमें इंसानी शरीर की एपोप्टोटिक कोशिका (बैंगनी रंग में) को कोविड-19  वायरस (पीले रंग में) घेरे हुए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक एपोप्टोटिक कोशिकाएं सिंगल या एक समूह में होती हैं। ये वायरस से संक्रमित होने के बाद जल्द ही खुद को नष्ट कर लेती हैं।

हर एक कोशिका एक मेम्ब्रेन या झिल्ली में सुरक्षित होती है। 2 अप्रैल को पहली बार एक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से SARS-CoV2 का पहला ब्लैक एंड व्हाइट फोटो लिया गया। इसमें एक लाल रंग के तीर से समझाया गया है कि वायरस की सतह पर ग्लाइकोप्रोटीन के खास तंतु होते हैं जो कोशिका को पकड़ने के काम आते हैं। इस तस्वीर में छोटे काले धब्बों के रूप में वायरस दिखाई दे रहे हैं।

SARS-COV-2 वायरस कोशिका के साइटोप्लाज्म यानी एक कोशिका के जीवनरस में संक्रमण प्रक्रिया शुरू करता है। साइटोप्लाज्म के अंदर ही कोशिका का केंद्र न्यूक्लिअस होता है, जो कोशिका की आनुवंशिक सामग्री को जमा करने के लिए जिम्मेदार होता है। जैसे ही वायरस संक्रमित कोशिका के अंदर घुसता है तो उसकी झिल्ली के अंदर ही तेजी से अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर देता है। इस चित्र में बांई तरफ एक सफेद कोशिका में गोल-गोल कोरोनावायरस देखे जा सकते हैं।

इस तस्वीर में काले रंग के धब्बों के रूप में SARS-COV-2 वायरस  के झुंड नजर आ रहे हैं। एक बार कोशिका में घुसने और उसके साइटोप्लाज्म को संक्रमित करने के बाद ये वायरस न्यूक्लिअस को निशाना बनाते हैं जिसमें जेनेटिक मटेरियल यानी डीएनए होता है। इससे कोशिका की पूरी कार्यप्रणाली नष्ट हो जाती है और कोशिका स्वयं को नष्ट करने का प्रोग्राम शुरू कर देती है। तस्वीर में V शेप में कुछ संरचनाएं नजर आ रही हैं जो एंटीबॉडीज हैं। एंटीबॉडीज संख्या में कम होती हैं और ज्यादा संक्रमण होने पर वायरस से मुकाबला नहीं कर पातीं। 

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