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असम में अफ्रीकी स्वाइन फीवर से 2500 सुअरों की मौत, यह देश का पहला मामला, 5 सवालों से समझिए क्या है यह बीमारी

  • अफ्रीकी स्वाइन फीवर ‘लार्ज डीएनए वायरस’ से फैलता है, पहला मामला 1909 में केन्या में सामने आया था
  • वजन घटना, तेज बुखार होना, त्वचा पर अल्सर और भूख में कमी आना जैसे लक्षण सुअर में दिखाई देते हैं

दैनिक भास्कर

May 05, 2020, 06:10 PM IST

गुवाहाटी. असम में अफ्रीकी स्वाइन फीवर का पहला मामला सामने आया है। इस बीमारी से राज्य 306 गांव में 2500 से अधिक सुअरों की मौत हो गई है। असम के पशुपालन मंत्री अतुल बोरा का कहना है कि देश में इस बीमारी का यह पहला मामला है और लेकिन हम सुअरों को मारेंगे नहीं। मामले रोेकने के लिए संक्रमण प्रभावित क्षेत्र के 1 किमी में कंटेनमेंट जोन और 10 किमी के दायरे में सर्विलांस जोन बनया जाएगा। मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बीमारी से निपटने के लिए पशुपालन विभाग से सुझाव मांगे हैं। वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ से जानिए क्या होती है यह बीमारी-

#1) क्या है अफ्रीकी स्वाइन फीवर?
यह घरेलू और जंगली सुअरों में फैलने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। अफ्रीकी स्वाइन फीवर असफारविरिडे फैमिली के ‘लार्ज डीएनए वायरस’ से फैलती है। इसका वायरस एशिया, अफ्रीका और यूरोपीय देशों में पाया जाता है। अफ्रीकी स्वाइन फीवर का पहला मामला 1909 में केन्या में दर्ज हुआ था। 

#2) कैसे पहचानें सुअर इस बीमारी से संक्रमित है?
अफ्रीकी स्वाइन फीवर के लक्षण सुअर की स्किन पर भी दिखते हैं। संक्रमित होने पर वजन में कमी होना, बुखार का तेजी से बढ़ना, त्वचा पर अल्सर दिखना और भूख में कमी आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

#3) क्या इस बीमारी का वायरस इंसानों को भी संक्रमित करता है?

नहीं, इंसानों को खतरा नहीं क्योंकि इसका वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करता। 

#4) कैसे फैलती है यह बीमारी?
वायरस से संक्रमित मल, खाने और कचरे के सुअर के पेट में पहुंचने से संक्रमण फैलता है। अफ्रीकी स्वाइन फीवर सुअर में कैसे फैलता है यह उसके आसपास के माहौल पर भी निर्भर करता है। जैसे पर्यावरण में संक्रमण फैलना,  किसी संक्रमित सुअर का सुअरों के फार्म में पहुंचना या वायरस का संक्रमण फैलाने वाले वेक्टर टिक का सीधे तौर सुअर के सम्पर्क में आना। 

#5) इसे रोकने का तरीका क्या है?
इस बीमारी की अब तक कोई वैक्सीन नहीं तैयार की जा सकी है। लैब में टेस्टिंग के बाद संक्रमित सुअर को अलग किया जाता है और इसके मांस के निर्यात पर पाबंदी लगाई जाती है। संक्रमित सुअर के मल, जूठे खाने जैसी चीजों को सावधानीपूर्वक हटाया जाता है।

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