May 25, 2022 : 3:19 AM
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मैरिटल रेप पीड़िता के दर्द और क़ानून पर छिड़ी बहस

उत्तरप्रदेश की रहने वाली 22 साल की रितु (बदला हुआ नाम) की अरेंज्ड मैरिज हुई थी. वे अपने होने वाले पति के परिवार के बारे में नहीं जानती थी. शादी के बाद उन्हें अपने पति और वो क्या काम करते हैं, इसकी जानकारी मिली. वो अपने पति से शारीरिक संबंध बनाने में सहज नहीं थी.

रितु के मना करने पर उनके पति उनसे जबरन शारीरिक संबंध बनाने लगे, उन्हें शारीरिक प्रताड़ना दी जाने लगी और कई बार उन्हें दवाएं खिलाईं गईं जिससे उन्हें उस वक्त होश नहीं रहता था.

रितु ने ये बात जब अपनी मां को बात बताई कि उनके पति उनसे जबरन शारीरिक संबंध बनाते हैं, उन्हें दर्द होता है तो उनकी मां का कहना था कि पति पत्नी के बीच तो ये होता ही है, इसे जबरदस्ती नहीं कहते हैं, तुम उसे मना करती होगी इसलिए वो तुम्हारे साथ ऐसा करता होगा.

ये साल था 2020 जब भारत में कोरोना महामारी की पहली लहर छाई हुई थी.रितु की काउंसलिंग करने वाली डॉली सिंह कहती हैं, ”आगे चलकर इस मामले में रितु के घरवालों ने ये कहकर मदद करने से इंकार कर दिया कि ये तुम्हारे घर का मामला है. और उसके पति ने उसके साथ पिटाई की और उसे कमरे में बंद कर दिया था.”

डॉली सिंह बताती हैं कि जब रितु को कमरे में बंद किया गया तो उनके पास फोन था. उन्हें यूट्यूब के ज़रिए हमारी संस्था के बारे में जाना और हमसे संपर्क साधा.

शक्ति शालिनी एक गैर सरकारी संस्था है जो जेंडर और यौन हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद करती है और भारती सिंह इस संस्था की संस्थापक निदेशक हैं.

कोलकाता में इस संस्था के लिए पूर्वी क्षेत्र का काम देखने वाली डॉली सिंह बताती हैं, ”रितु ये नहीं जानती थी कि शादी में उसके साथ जो जबरन संबंध बनाए जा रहे थे उसके लिए मैरिटल रेप या वैवाहिक बलात्कार शब्द का उपयोग किया जाता है लेकिन वो ये जरूर जानती थी कि जबरदस्ती बनाया गया रिश्ता गलत होता है.”

रितु बहरहाल संस्था की मदद से अब क़ानूनी प्रक्रिया का सहारा ले रही हैं. वे एक कॉल सेंटर में नौकरी कर रही हैं. और वो अपने परिवार और ससुराल से संपर्क में नहीं हैं.

दिल्ली हाई कोर्ट में याचिकाएं

दिल्ली हाई कोर्ट में मैरिटल रेप पर डाली गई याचिकाओं पर हाल ही में सुनवाई हुई. हाई कोर्ट में दायर हुई याचिकाओं में भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद 2 को चुनौती दी गई है.

इस पर हाई कोर्ट ने केंद्र से इस सवाल पूछा था जिसके जवाब में केंद्र ने एक ताज़ा हलफनामा दायर कर कहा है कि क़ानून में प्रस्तावित संशोधन के लिए विचार-विमर्श चल रहा है और इस संबंध में याचिकर्ता सुझाव दे सकते हैं.

साथ ही केंद्र ने कोर्ट को ये सूचित किया है कि मैरिटल रेप को तब तक एक अपराध नहीं बनाया जा सकता जब तक इस मामले से संबंधित सभी पक्षों के साथ सलाह मशविरा की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती.

भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में बलात्कार की परिभाषा बताई गई है और उसे अपराध बताया गया है. इन याचिकाओं में इस धारा के अपवाद 2 पर आपत्ति जताई गई है.

ये अपवाद कहता है कि अगर एक शादी में कोई पुरुष अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, जिसकी उम्र 15 साल या उससे ऊपर है तो वो बलात्कार नहीं कहलाएगा, भले ही उसने वो संबंध पत्नी की सहमति के बगैर बनाए हों.

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