January 23, 2022 : 11:47 PM
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Paytm पेटीएम की डरावनी कहानी

पेटीएम

पेटीएम के शेयर यानी पेटीएम चलानेवाली कंपनी वन नाइन्टी सेवन कम्युनिकेशंस लिमिटेड के शेयर पहले ही दिन जैसे धड़ाम से गिरे, वो कोई अनहोनी नहीं थी.

कंपनी के कामकाज़, कंपनी के मुनाफ़े और घाटे, कंपनी जिस कारोबार में है, उसमें लगातार बढ़ते मुक़ाबले के साथ कंपनी के अनिश्चित भविष्य की आशंकाएं देखते हुए तमाम जानकार यह चेतावनी दे चुके थे कि पेटीएम में पैसा लगाना शायद ठीक नहीं होगा.

शेयर बाज़ार की रवायत है कि ख़ासकर बड़ी कंपनियों के बारे में आसानी से कोई बुरा नहीं बोलना चाहता है. इसलिए किसी ने सीधे-सीधे यह तो नहीं कहा कि इसमें पैसा मत लगाइए, लेकिन पर्याप्त संकेत दे दिए थे कि अगर आप यहाँ पैसा न लगाएं तो ठीक रहेगा.

आइपीओ से पहले आने वाली रिपोर्टों में इसे अवॉयड या स्किप की रेटिंग कहा जाता है.

कुछ लोग इन्वेस्ट फोर लॉन्ग टर्म भी कहते हैं. हालांकि ऐसा कहने वाले यह भी बता देते हैं कंपनी का कारोबार बहुत अच्छा है इसलिए लंबे समय की सलाह दे रहे हैं या फिर इसलिए क्योंकि कंपनी हाल फ़िलहाल तो बहुत अच्छा नहीं कर रही, इसलिए हो सकता है कि आप काफ़ी लंबे समय तक यह शेयर रखें तो फ़ायदा हो जाए. अब यह भी कोई बताने की बात नहीं है.

मुनाफ़ा कमाने का इंतज़ार करें या?

असली सवाल यह है कि देश का सबसे बड़ा आइपीओ लाकर पेटीएम ने बाज़ार से 18 हज़ार तीन सौ करोड़ रुपए की बड़ी रक़म उठा ली. लिस्टिंग के दिन ही कंपनी का मार्केट कैप क़रीब 39 हज़ार करोड़ रुपए गिर गया.

जिन लोगों ने 2150 रुपए में शेयर ख़रीदा उन्हें पहले ही दिन कम से कम नौ पर्सेंट और ज़्यादा से ज़्यादा साढ़े सत्ताइस पर्सेंट का घाटा हो चुका था.

उसके बाद भी गिरावट का सिलसिला थमेगा या नहीं कहना मुश्किल है क्योंकि एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज ने पेटीएम का सही भाव 1200 रुपए बताकर इसे अंडरपरफॉर्म की रेटिंग देनेवाली रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट लिस्टिंग के दिन बाज़ार खुलने से पहले ही आ चुकी थी.

और अब तो सोमवार को बाज़ार खुलने के बाद ही पता चलेगा कि जिन निवेशकों ने अब तक शेयर नही बेचे हैं या जो पहले दिन बेच नहीं पाए वो आगे क्या करेंगे. क्योंकि अब तमाम जानकार कह रहे हैं कि जो घाटा हो रहा है, उसे खाकर भी पेटीएम के शेयर से निकल जाना बेहतर रहेगा

गु़स्सा और हताशा

अब जिन लोगों ने एक के बाद एक कई जगह अर्जी लगाई और कुछ नहीं मिला, वो अपने आसपास के लोगों को देखकर एक तरह से ग़ुस्से में या हताशा में हर इशू में अर्जी लगा रहे हैं कि कहीं कुछ तो मिलेगा.

इसी चक्कर में लोग फिर हर आइपीओ में अप्लाइ करते हैं और कई बार हाथ जला लेते हैं. 2021 में बहुत बड़ी संख्या में आइपीओ आए हैं. क़रीब 50 कंपनियों की लिस्टिंग हुई है, जिनमें कुल मिलाकर औसतन 31 पर्सेंट की कमाई हुई है. लिस्टिंग के दिन का आँकड़ा है यह.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर आइपीओ में कमाई ही हुई. पेटीएम सबसे भयानक कहानी है, क्योंकि यहाँ पहले ही दिन शेयर इशू प्राइस से 27.5 पर्सेंट नीचे जाकर बंद हुआ, लेकिन इससे पहले भी कुछ कंपनियों में लिस्टिंग के दिन ख़ासा नुक़सान दिख चुका था.

इनमें कल्याण जूलर्स और विंडलास बायोटेक जैसी कंपनियां हैं, जो 10 पर्सेंट से ज़्यादा गिरीं और सूर्योदय, कारट्रेड, नुवोको विस्टाज और एसआइएस एंटरप्राइजेस जैसी कंपनियां हैं, जो लिस्टिंग के दिन ही पाँच से 10 पर्सेंट तक गिरीं.

हालांकि ख़राब लिस्टिंग का अर्थ यह क़तई नहीं है कि कंपनी का कारोबार अच्छा नहीं है. इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जब कंपनी का आइपीओ पूरा नहीं भरा या लिस्टिंग के दिन शेयर नीचे रहा लेकिन बाद में उसने जमकर कमाई करवाई.

 

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